
पिछली महाशिवरात्रि पर, मैं एक ऐसी शक्तिशाली साधना विधि में साधकों को दीक्षित करने वाला था, जो समस्त तांत्रिक, वैदिक और योगिक शास्त्रों का निचोड़ है। यह एक ऐसी साधना है, जिससे इतिहास में हज़ारों साधकों ने प्रबुद्धता प्राप्त की, किंतु आज वह पूर्णतः लुप्त हो चुकी है।
मैंने यह निश्चय किया था कि मैं केवल उन्हीं साधकों को इसके लिए चुनूँगा जो बुद्धि, मन और शरीर से तैयार हों; जिनमें सत्य को जानने और भगवत्ता को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा हो। क्योंकि यदि इस दूध जैसी पवित्र साधना को मैं एक ऐसे बर्तन में डालूँ जिसमें विष या अशुद्धि हो, तो वह दूध भी अपवित्र होकर विष बन जाएगा। इसीलिए, योग्य पात्र होना अत्यंत आवश्यक है।
किंतु जब मैंने इस पर मंथन किया, तो पाया कि ऐसे लोग गिने-चुने ही होंगे — शायद मेरे 2 लाख सब्सक्राइबर्स में से केवल 5–10, या शायद वे भी पूरी तरह तैयार नहीं। तब प्रश्न उठा कि शेष उन दर्शकों का क्या होगा जो मुझे देखते हैं? जिनमें इच्छा तो है, किंतु जो भटके हुए हैं; जो अपने मन से परेशान और शरीर से कमज़ोर हैं। जो वासनाओं और मानसिक विकारों से पीड़ित हैं, जिनकी आध्यात्मिक समझ अभी परिपक्व नहीं है, फिर भी वे मुझे सुनते हैं और मुझ पर अटूट भरोसा करते हैं — उनका क्या?
इसीलिए मैंने एक दूसरा मार्ग चुना, जिस पर मैं पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहा हूँ — आप सभी को पहले तैयार करने का मार्ग। बुद्धि, मन और शरीर के स्तर पर आपको सशक्त बनाने का प्रयास।
मगर याद रहे, इच्छा मैं जागृत नहीं कर सकता और श्रद्धा मैं सिखा नहीं सकता; वह आपके भीतर पहले से होनी अनिवार्य है। जो मेरे सामर्थ्य में है, वह मैं अवश्य करूँगा। यह मार्ग कठिन है, किंतु कदाचित शिव की यही इच्छा है।
इसी उद्देश्य हेतु मैंने पिछली महाशिवरात्रि पर ‘The S-Turn Program’ आरंभ किया था, जो अत्यंत सफल रहा। आपमें से कई लोग जो पिछली बार नहीं जुड़ पाए थे, वे जुड़ना चाहते थे; इसीलिए इस वर्ष महाशिवरात्रि पर हम पुनः इस प्रोग्राम का आयोजन कर रहे हैं।
इस प्रोग्राम के माध्यम से, मैं कुछ समय के लिए आपमें से कुछ लोगों पर व्यक्तिगत रूप से काम करना चाहता हूँ। मेरा लक्ष्य आपको उस गूढ़ साधना के लिए तैयार करना है। इसके लिए हमारा टेलीग्राम (Telegram) पर एक Private Group होगा, जहाँ मैं ‘Step 0’ से साधकों को प्रशिक्षित करना प्रारंभ करूँगा।
हम अत्यंत सरल चरणों से, baby steps से शुरुआत करेंगे। आप विभिन्न साधनाएँ सीखेंगे, शास्त्रों का गहन अध्ययन होगा, और आप प्राणायाम, योगासन, मुद्रा, न्यास, तथा भूतशुद्धि जैसी कुंडलिनी क्रियाओं एवं सही आचरण का अभ्यास करेंगे। यह प्रयोग अगले 3 से 6 महीनों तक चलेगा। पिछली बार एक वर्ष तक चला था, और आगे भी निरंतर चलता रहेगा।
धीरे-धीरे आपकी योग्यता को देखते हुए, मैं ऐसे पात्रों का निर्माण करना चाहता हूँ जो ‘शिव-चैतन्य’ के, उनके ज्ञान और उनकी इच्छा के वाहक बन सकें। मैं चाहता हूँ कि आप वह उपजाऊ भूमि बनें, जिसमें ‘त्रिक’ और ‘शिवज्ञान’ का बीज एक विशाल वृक्ष बनकर फलीभूत हो सके।
किंतु, वर्तमान में उस मिट्टी में वह प्राणशक्ति शेष नहीं है। जिन युवाओं पर मैं कार्य करना चाहता हूँ, वे मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं — Anxiety, Depression, ADHD और OCD जैसी समस्याओं ने उन्हें घेर रखा है। सबसे पहले हमें इन्हें ठीक करना होगा। हमें ‘क्षिप्त’, ‘मूढ़’ और ‘विक्षिप्त’ मन को एकाग्र करना होगा, तभी वह अनंत क्षमता बाहर आ सकेगी जो इन युवाओं के भीतर छिपी है।
मैं अधिक शब्द नहीं कहना चाहता; मैं नहीं चाहता कि आप बहुत सारी अपेक्षाओं के साथ आएँ। नहीं, यह केवल उन्हीं के लिए है जो पाने से अधिक देना जानते हैं — अपना विश्वास, अपनी मेहनत और स्वयं को बदलने का संकल्प। यह उन लोगों के लिए है जो अपने जीवन की बागडोर अपने हाथों में लेना चाहते हैं, जो स्वयं पर कार्य करना चाहते हैं और जिनमें आत्म-साक्षात्कार की वास्तव में एक तीव्र इच्छा है; जो अपनी आध्यात्मिक खोज को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं।
सच कहूँ तो, मैं इसे पूर्णतः निःशुल्क रखना चाहता था। मेरी प्रारंभिक योजना भी यही थी कि कुछ गिने-चुने लोगों के लिए 3–4 दिनों का एक सत्र हो, जहाँ मैं बस वह विधि प्रदान कर दूँ। मगर अब जब यह 3 से 6 महीनों का विषय हो गया है, जहाँ एक ग्रुप बनाकर मुझे हर समय साधकों की निगरानी करनी होगी ताकि वे कोई त्रुटि न करें, और जहाँ ‘Step 0’ से काम करना है, तो मैं चाहकर भी इसे निःशुल्क नहीं रख सकता।
इसीलिए, मैंने ₹5000 का एक न्यूनतम सहयोग (Minimum Contribution) निर्धारित किया है। किंतु, यह पूरी तरह से Not-for-profit होगा। इससे प्राप्त होने वाला संपूर्ण अंशदान ‘राम-राज्य’ के कार्यों में, संगठन के गठन में, तथा वेबसाइट, आश्रम, मंदिर एवं गुरुकुल के निर्माण में लगाया जाएगा।
रुद्रयामल में शिव कहते हैं:
ऋणदानं तथाऽऽदानं वस्तूनां क्रयविक्रयम् ।न कुर्याद्गुरुणा सार्द्धं शिष्यो भूत्वा कदाचन ।।
अर्थात्, शिष्य और गुरु के बीच ऋण का आदान-प्रदान या वस्तुओं का क्रय-विक्रय (व्यापार) कभी नहीं होना चाहिए।
अतः यह एक ‘दान’ (Contribution) है, न कि कोई व्यापार; ताकि यह समूह स्वयं को संचालित कर सके। यह एक महायज्ञ में आहुति के समान है।
इस ₹5000 के अंशदान से हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि इस समूह में केवल वही लोग आएं जिन्हें वास्तव में तीव्र इच्छा है और मुझ पर अटूट विश्वास है, क्योंकि उसके बिना कार्य सिद्ध नहीं हो पाएगा। दूसरी बात यह है कि अतीत में मैंने कुछ निःशुल्क टेलीग्राम समूह बनाए थे ताकि लोग साधना करें और एक-दूसरे का सहयोग करें। उसमें कोई भी सम्मिलित हो सकता था, किंतु परिणाम यह हुआ कि वहाँ ऐसे लोग आने लगे जिन्हें साधना से कोई सरोकार नहीं था। वे व्यर्थ की बहस करते, लोगों को भड़काते, स्त्रियों को परेशान करते और मर्यादाओं का उल्लंघन करते थे।
एक समय तो ऐसा आया कि AI द्वारा निर्मित ‘Morphed’ (विकृत) चित्र भी बनाए जाने लगे। उन्हें ग्रुप से प्रतिबंधित (Ban) करने पर वे दूसरे अकाउंट से पुनः आ जाते थे, क्योंकि प्रवेश निःशुल्क था। अंततः मुझे वह समूह हटाना पड़ा। इस प्रकार का योगदान ऐसे अवांछनीय तत्वों को भी दूर रखेगा। दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत में जो भी वस्तु निःशुल्क और सार्वजनिक होती है, लोग उसकी ऐसी स्थिति कर देते हैं कि वह उपयोग के योग्य नहीं रह जाती — चाहे वह सार्वजनिक शौचालय हो या अस्पताल।
तीसरी बात है ‘अपरिग्रह’ का नियम, जो योग मार्ग में अनिवार्य है — अर्थात किसी से भी कुछ भी ‘मुफ़्त’ में या उपहार स्वरूप स्वीकार न करना। अतः इन नियमों का पालन करें।
कुल मिलाकर, मेरे पास इसके अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं था। फिर भी, मैं मानता हूँ कि कुछ लोग ऐसे होंगे जिनकी तीव्र इच्छा और मुझ पर विश्वास होने के बाद भी, आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होगी; जैसे कि विद्यार्थी या वे लोग जो अभी रोज़गार की तलाश में हैं, जिनका घर का खर्च भी अत्यंत कठिनाई से चल पा रहा है। ऐसे साधक मुझे इस ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं: team.adisuyash@gmail.com। आप जितना भी सामर्थ्य अनुसार योगदान कर सकें, उतना करके प्रवेश पा सकते हैं।
पिछले S-Turn प्रोग्राम में, मैंने आधे से अधिक लोगों को (लगभग 70%) या तो निःशुल्क या बहुत कम शुल्क में सम्मिलित किया था। किंतु उसका परिणाम सुखद नहीं रहा। मैंने यह सोचकर उन्हें निःशुल्क प्रवेश दिया था कि वे कृतज्ञता भाव से और भी निष्ठापूर्वक साधना करेंगे, परंतु उनमें से अधिकांश ने बहुत जल्दी अपनी रुचि खो दी और प्रोग्राम भी पूरा नहीं किया। मैं सबकी बात नहीं कर रहा, परंतु बहुसंख्यक ऐसे ही थे। कुछ ही लोग थे जो अंत तक समर्पित रहे। इसीलिए यह विकल्प अभी भी उपलब्ध है, किंतु अत्यंत सीमित; केवल कुछ ही लोगों को यह अवसर दिया जाएगा।
मैं आपको एक घटना बताता हूँ — पिछली बार STurn के प्रथम दिन ही एक ऐसा व्यक्ति ग्रुप में आ गया जिसे मैंने निःशुल्क प्रवेश दिया था। वह व्यक्ति अन्य सदस्यों को पर्सनल मैसेज भेजकर यह कहने लगा कि जिन्होंने कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं किया है, वे उसे पैसे भेज दें क्योंकि वह ‘एडमिन’ है। उसने स्वयं दो-तीन फर्जी अकाउंट्स बनाकर निःशुल्क प्रवेश लिया था। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसका कड़ाई से ध्यान रखा जाएगा। इसीलिए, मैं केवल कुछ गिने-चुने लोगों के ही अनुरोध स्वीकार करूँगा।
इसके लिए आप यहाँ इस फॉर्म को भर सकते हैं:
मगर ध्यान रहे, यहाँ सत्य अनिवार्य है। यदि आप असत्य का सहारा लेते हैं या छल करने का प्रयास करते हैं — चाहे स्वयं से या मुझसे — तो ये साधनाएँ प्रभावहीन हो जाएँगी; अपितु इनका दुष्प्रभाव भी हो सकता है। अतः झूठ बोलकर जुड़ने से बेहतर होगा कि आप इसमें सम्मिलित न हों। सत्य और अपरिग्रह, दोनों ही ‘यम-नियम’ के आधार स्तंभ हैं।
इस कार्यक्रम का नाम मैंने ‘S-Turn’ रखा है। ‘S’ अर्थात शिव की ओर मुड़ना, स्वात्म की ओर मुड़ना और पूर्ण स्वतंत्रता की ओर मुड़ना। ‘S-Turn’ लेने का अर्थ है — जीवन के जिस मुकाम पर आप वर्तमान में हैं, वहाँ से अंतर्मुखी होना, स्वयं से और अपनी शक्ति से साक्षात्कार करना; और फिर जब आप सशक्त हो जाएँ, तो जो चाहें वह करने के सामर्थ्य के साथ वापस बाहर की ओर लौट आना।
इस कार्यक्रम के लिए आप यहाँ रजिस्टर कर सकते हैं: All Seats Full
आपके योगदान से अधिक मुझे आपकी आवश्यकता है, क्योंकि आपके हृदय में ही मैं इस ज्ञान के बीज बोऊँगा। आपमें ही यह बीज फल बनेगा। पहले मैं आप सभी को ‘राम’ के आदर्शों में ढालना चाहता हूँ, और तत्पश्चात आप ही उस ‘राम-राज्य’ का निर्माण करेंगे।
ओम् नमः शिवाय।
आदि सुयश, फ़रवरी 2026
रजिस्टर करने से पहले कृपया ध्यान से पढ़ें
- कार्यक्रम की अवधि: यह प्रोग्राम न्यूनतम 3 से 6 महीने तक चलेगा। इसमें ध्यान, और कई ऑडियो और वीडियो सेशन्स शामिल हैं। इसके लिए नियमित अभ्यास, अनुशासन और दी गई अध्ययन सामग्री को पढ़ना आवश्यक है। कृपया तभी जुड़ें यदि आप इन अभ्यासों को पूरी गंभीरता और निष्ठा से करने के लिए तैयार हैं।
- भाषा: हिंदी
- आयु सीमा: न्यूनतम आयु 16 वर्ष। 16 से 18 वर्ष के प्रतिभागियों के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य है।
- प्रोग्राम कहाँ होगा (Telegram): सभी सेशन्स और सूचनाएं Telegram ग्रुप और चैनल के माध्यम से दी जाएंगी। भाग लेने के लिए आपके फोन में Telegram ऐप होना ज़रूरी है। योगदान करने के बाद, आपको अपने आप टेलीग्राम ग्रुप पर भेज दिया जाएगा। ग्रुप का लिंक पेमेंट के बाद ‘कन्फर्मेशन पेज’ पर और आपके ईमेल पर भेजी गई ‘रसीद (PDF)’ में भी मिल जाएगा। यदि आप ग्रुप से न जुड़ पाएं, तो सहायता के लिए team.adisuyash@gmail.com पर संपर्क करें।
- स्वास्थ्य संबंधी जानकारी: यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है (जैसे हाल ही में हुई सर्जरी, हृदय रोग या कोई अन्य बड़ी समस्या), तो कृपया जुड़ने से पहले team.adisuyash@gmail.com पर लिखकर परामर्श कर लें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये अभ्यास आपके लिए सुरक्षित हैं।
- सहयोग राशि (Contribution): इस प्रोग्राम के लिए न्यूनतम सहयोग राशि ₹5,000 है। यदि आपको लगता है कि यह प्रोग्राम आपके लिए अधिक मूल्यवान है, तो आप अपनी स्वेच्छा से अधिक योगदान दे सकते हैं। अतिरिक्त राशि का उपयोग उन साधकों की मदद के लिए किया जाएगा जो योगदान में असमर्थ हैं, और इसका उपयोग ‘राम राज्य’ के मिशन में किया जाएगा।
- विशेष नोट: एक बार जमा की गई सहयोग राशि वापस (Refund) नहीं की जाएगी।
इस प्रोग्राम में आपको क्या प्राप्त होगा ?
- आदि सुयश द्वारा व्यक्तिगत मार्गदर्शन: आपके ईमेल द्वारा पूछे गए प्रश्नों के आदि सुयश द्वारा उत्तर।
- साप्ताहिक ग्रुप चैट: जहाँ आपके प्रश्नों के उत्तर स्वयं आदि सुयश द्वारा दिए जाएंगे। साथ ही, गहन विमर्श और मार्गदर्शन के लिए समय-समय पर ‘लाइव सेशन्स’ का आयोजन।
- आत्म-रूपांतरण पर गहन ऑडियो सेशन्स: आंतरिक स्वतंत्रता और आत्म-रूपांतरण के विज्ञान को विस्तार में समझाया जाएगा, जो प्राचीन तांत्रिक और योगिक परंपराओं पर आधारित हैं तथा जिन्हें पूर्वी दर्शन, आधुनिक मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
- क्रमबद्ध क्रिया प्रशिक्षण: तांत्रिक और योगिक संप्रदायों से ली गई ध्यान और प्राणायाम विधियों का चरणबद्ध प्रशिक्षण।
- एक व्यवस्थित साधना यात्रा: यह यात्रा कई महीनों (सामान्यतः 3 से 6 माह) तक सहज रूप से चलेगी। संभवतः एक वर्ष तक भी चल सकती है, जैसा कि पिछले बैच के लिए हुआ था।
- प्रमुख अभ्यास: इसमें उदय ध्यान, भूत शुद्धि, मातृका न्यास, नाग श्वास, मंत्र जप और कई अन्य पूरक अभ्यास सम्मिलित हैं। ये सभी अपनी उचित विधि, परंपरा-सम्मत स्वरूप और वैज्ञानिक आधार के साथ सिखाए जाएंगे।
- आदि सुयश द्वारा दो आधिकारिक दीक्षाएं: मंत्र साधना में आपको सशक्त बनाने के लिए ‘नाम दीक्षा’, और प्रोग्राम के समापन पर ‘समय दीक्षा’, जो आपको आधिकारिक रूप से तंत्र योग परंपरा में प्रवेश के योग्य बनाती है।
वैज्ञानिक आधार (Scientific Backing)
पिछले S-Turn बैच के प्रतिभागियों से पूरे प्रोग्राम के दौरान साप्ताहिक ‘स्व-मूल्यांकन’ (Self-reflection inventories) करवाया गया, जिसमें उनके तनाव, अवसाद, ADHD के लक्षण और OCD की प्रवृत्तियों पर नज़र रखी गई।
प्रोग्राम के अंत तक, सभी क्षेत्रों में स्पष्ट और बड़े सुधार देखे गए:
- तनाव (Anxiety): औसतन 50–60% की कमी।
- अवसाद (Depression): लक्षणों में लगभग 45–55% की कमी।
- ADHD: एकाग्रता (Focus), मानसिक स्पष्टता और भावनाओं के संतुलन में 30–35% का सुधार।
- OCD: अनचाहे विचारों (Intrusive thoughts) और बाध्यकारी व्यवहार में 25–35% की कमी।
हालाँकि हर व्यक्ति के परिणाम अलग हो सकते हैं, लेकिन समग्र रूप से प्रोग्राम के समापन तक भावनात्मक संतुलन, मानसिक स्पष्टता और मानसिक स्वास्थ्य में निरंतर सुधार देखा गया।
S-Turn साधना क्रम के अभ्यास कई स्वतंत्र अध्ययनों द्वारा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं, जो शरीर में:
- ⬇️ कोर्टिसोल के स्तर को कम करते हैं — जो तनाव पैदा करने वाला हार्मोन है।
- ⬆️ सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाते हैं — जो खुशी महसूस कराने वाला हार्मोन है।
- ⬆️ मेलाटोनिन के स्तर को बढ़ाते हैं — जो बेहतर नींद के लिए सहायक है।
- ⬆️ सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या बढ़ाते हैं — जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं।
ये सभी सामूहिक रूप से तनाव और मानसिक आघात (Trauma) को कम करने में मदद करते हैं, साथ ही इच्छाशक्ति, अनुशासन, भावनात्मक स्थिरता, नींद की गुणवत्ता, आनंद, बुद्धि, रचनात्मकता और कार्यक्षमता (Productivity) में वृद्धि करते हैं।
S-Turn का अगला बैच 15 फ़रवरी को शुरू होगा, यहाँ रजिस्टर करें: All Seats Full


